गणितम् अध्यायः ४ ५एवं ६

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अध्यायः ४.१
मूलभूत -ज्यमितीय-अवधारणा


ज्यामितः एकः पुरातनः अपि च बहुमूल्यः इतिहासः अस्ति। ज्यामितः इित शब्दः आङ्लसमान-यवन-शब्दात ’जियोम ट्रोन्’ (Geometron) इत्यतमात् नितसृतः । जियो (Geo) इत्यतयार्थः अस्ति भूमिः इति, मेट्रोन्(metron) इत्यस्य अस्ति मापनम् इति । इतिहासकाराणां मतानुसारेण पुरातन काल प्रायः कलाशिल्पकला-भूमिमापनस्य् आवश्यकतानां कारणेन ज्यामितीय-अवधारणाः विकसिताः । अत्र त अपि अवसराः सम्मलितः सन्ति, यदा कस्या्पि दूषणस्य् समभावना विना कृषिभूमिः परिसीमानाम् निर्धा्रणम् भवति स्म् ।
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अध्यायः ४.2


प्रायोिगक-ज्यािमितः
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अध्यायः–५.१

गणनानां प्रबन्धनम्

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अध्यायः ५.२

मूलभूत-अकाराणां ज्ञानम्

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अध्यायः ५.३

पूर्णांङ्कः
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अध्यायः ६

वर्गः वर्गमूलञ्च
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॥ भगवती के ५१ प्रमुख शक्तिपीठ ॥
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२७/०७/२०१८/- शुक्रवार
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